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जौनपुर:  मामा-भांजे चला रहे है खेतासराय थाना

 

जौनपुर

 

वैसे तो कानून व्यवस्था के लिए ज़िले में एक कप्तान होता है और उसके मातहत कई अधिकारी उसके निर्देशों का पालन करते हुए काम करते हैं। सबसे अहम कड़ी थाना होता है। हर थाने में एक थानाध्यक्ष होता है और उसके अंडर में कई पुलिस वाले काम करते हैं। पर जौनपुर ज़िले में एक थाना ऐसा है जहां इसके विपरीत बिल्कुल है।

 

जी हां… हम बात कर रहे हैं खेतासराय थाना की। यहां एक मामा-भांजे की जोड़ी ही थाने को चला रही है। वैसे तो मामा स्थानीय गुरैनी बाज़ार में पेटी की दुकान खोल रखी है पर उसका काम दुकान में थाने के किसी भी मामले को निपटाना है। मामा अपने गुर्गे के साथ क्षेत्र में होने वाले हर विवाद में कूद जाता है और पैसे लेकर मामले को हल कराता है।

 

इतना ही नहीं अगर किसी को जमीन पर कब्जा करना हो या किसी को प्रताड़ित करना हो या गोकशी का कोई मामला हो या गांजा बेचना हो या नंबर दो की कट्टा कारतूस। सही को गलत करना हो या फिर गलत को सहीं… गुरैनी बाज़ार में बैठे मामा के इशारे पर उसका भांजा दुबई में बैठकर लोगों को सेट करता है। उसके बाद खेल शुरु होता है लोगों को प्रताड़ित कर पैसे वसूली का।

 

किसका है करीबी

 

मामा-भांजे की इस जोड़ी में मामा कभी अपने आपको मस्जिद का फर्जी इमाम तो कभी एक संगठन का  नेता बताता है। सबसे हैरत की बात ये है कि मामा इस झूठ के सहारे पुलिस अधीक्षक से लेकर नेताओं, पत्रकारों को अपना करीबी बताता है और उनसे मिलने की फोटो अपने गुर्गे से सोशल मीडिया पर पोस्ट कराता है। मामा व भांजा लखनऊ में बैठे एक बड़े पत्रकार से मिलकर खेतासराय थाना क्षेत्र में मुसलमानों को परेशान और प्रताड़ित कर अपनी जेब गरम करने साथ कुछ हिस्सा थाने पर भी पहुंचाता है।

 

गांव के लोग आतंकित

 

मामा गुरैनी बाज़ार के पास एक गांव का रहने वाला है। उसका अपने गांव में कई लोगों से विवाद चल रहा है, दरअसल मामा लोगों को सिर्फ परेशान करता रहता है बल्कि पुलिस की मदद से उनके खिलाफ केस करता है। गांव के हर मामले में मामा दबंगई करता है।

 

मामा का इतिहास

 

करीब 20 साल पहले क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप लूटकांड व गुरैनी बाजार में डकैती हुआ था। इसमें तथाकथित मामा जेल जा चुका है। यहीं नहीं मामा अवैध हथियारों की तस्करी करने में जेल भी जा चुका है। जेल की सज़ा काटने के बाद मामा दुबई चला गया था। मामा-भांजे ने मिलकर वहां दुकान खोली मामा गुरैनी आ गया और भांजा दुबई में रह रहा है। ज़िले में कोई भी नया कप्तान आता है तो दुबई में बैठे भांजा लखनऊ में बैठे बड़े पत्रकार से फोन कराकर मामा को मिलने के लिए भेजता है। इसके बाद खेतासराय थाना की दुकान गुरैनी बाज़ार में सज़ जाती है।

 

आखिर में…

 

स्थानीय लोग इस मामा-भांजे की जोड़ी से बेहाल हो गए हैं। उन्हें बीजेपी के सत्ता में आने से लग रहा था कि अब इनका आतंक और दबंगई खत्म हो जाएगी पर मामा-भांजे की जोड़ी का अंत फिलहाल नज़र नहीं आ रहा है।

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