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दागदार हो रही वर्दी, अफसर डाल रहे जांच का पर्दा

सुरेश वैष्णव /श्योपुर (मध्यप्रदेश)

श्योपुर में खाकी वर्दी लगातार दागदार होती जा रही है। एडीश्नल एसपी व एसडीओपी से लेकर थाना प्रभारियों तक कई गंभीर आरोप लग रहे हैं। पुलिस की वर्दी पर कई मर्तबा इतने गंभीर आरोप लगाए गए कि पूरा महकमा शर्मशार हो गया था। पुलिस के खिलाफ शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और संभाग स्तर से लेकर पुलिस हेड क्वार्टर भोपाल के आला अफसर जांच बैठा रहे हैं, लेकिन आपको जानकर ताज्जुब ही होगा कि पुलिस अपनी जांच कभी पूरी करती ही नहीं है। वर्दी पर लगे दागों पर अफसरों ने जांच का पर्दा डाल रखा है। जो कब हटेगा यह भी कोई बताने को तैयार नहीं।

एएसपी पर लगे जातिवाद और रिश्वत के आरोप

सितंबर 2017 में जिले के कुछ पुलिसकर्मियों ने पांच पन्नों की शिकायत डीजीपी को भेजी थी। यह शिकायत एडिशनल एसपी सुमन गुर्जर के खिलाफ थी, जिसमें लिखा गया कि जिले में एसपी तो डॉ. शिवदयाल गुर्जर हैं, लेकिन पुलिस अधीक्षक का काम सुमन गुर्जर करती हैं और अपनी जाति के थानेदारों और अन्य पुलिसकर्मियों की अच्छी-अच्छी जगह पोस्टिंग कर रही हैं। एएसपी जातिवाद को बढ़ावा दे रही हैं और ब्राह्मण व ठाकुर कर्मचारियों को परेशान कर रही हैं। शिकायत में यहां तक लिखा था कि एएसपी राजस्थान के रेत माफियाओं को संरक्षण देती हैं। रिश्वत में थानेदारों से गहने तक लेती हैं और जो उनकी मांग पूरी नहीं करता उस थानेदार को परेशान करती हैं। इस शिकायत पर पीएचक्यू ने 13 अक्टूबर 2017 को श्योपुर एसपी को पत्र लिखकर जांच के आदेश दिए। एएसपी पर लगे आरोप सच थे या झूठे? शिकायत झूठी थी तो किसने की? इसका भी अब तक पता नहीं लगाया।

दो एसडीओपी पर लगे रिश्वत व शराब के आरोप

श्योपुर के वर्तमान एसडीओपी महेन्द्र शर्मा और पूर्व एसडीओपी जयराज कुबेर पर रिश्वत लेने की शिकायतें भी डीजीपी तक पहुंची। पूर्व एसडीओपी कुबेर के खिलाफ जैनी गांव के कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि नटीबाई हत्या मामले में एसडीओपी कुबेर ने कुछ आरोपियों के नाम केस से निकालने के नाम पर 2 लाख रुपए लिए। न तो नाम निकाले नहीं दो लाख रुपए लौटाए। इस मामले की जांच छह महीने से चल रही है, लेकिन परिणाम नहीं निकले। वर्तमान एसडीओपी महेन्द्र शर्मा के खिलाफ नीरज जाट नाम के युवक ने पिछले महीने शिकायत की थी कि एसडीओपी उससे अंग्रेजी शराब की बोतलें और 10 हजार रुपए की मांग कर रहे हैं। शराब व पैसा न देने पर झूठे केस में फंसाकर एनकाउंटर तक की धमकी के आरोप एसडीओपी पर लगे हैं।

दो हत्या और युवती को प्रताड़ित मामले की भी जांच अधूरी

12 दिसंबर 2017 को कोतवाली के तात्कालीन एएसआई बृजराज सिंह यादव के खिलाफ ऐसी शिकायत हुई थी जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था। पीजी कॉलेज की अज्ञात छात्रा के नाम से एसपी को मिली इस शिकायत में एएसआई यादव पर छात्रा ने अश्लील हरकतें कर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। शिकायत में संदिग्ध छात्रा ने आत्महत्या करने की चेतावनी के साथ लिखा था कि पूर्व में भी दो छात्राएं एएसआई से तंग आकर आत्महत्या कर चुकी हैं। एसपी डॉ. शिवदयाल ने इस मामले की जांच एसडीओपी महेन्द्र शर्मा को सौंपी है, लेकिन जांच रत्तीभर आगे नहीं बढ़ी। पुलिस सूत्रों की मानें तो यह शिकायत किसी छात्रा ने नहीं बल्कि कुछ पुलिसकर्मियों ने शहर के कुछ सटोरियों के साथ मिलकर की है इसलिए अब इसे जांच के नाम पर दबाया जा रहा है।

रेत माफियाओं से सांठगांठ में फंसी पुलिस

श्योपुर में रेत की एक भी वैध खदान नहीं। रेत राजस्थान से सामरसा और बड़ौदा के रास्ते अवैध तरीके से आता है। करीब चार महीने पहले रेत माफियाओं से सांठगांठ कर जिले में रेत का अवैध कारोबार बढ़वाने के आरोप एसडीओपी शर्मा, तात्कालीन ट्रैफिक थाना प्रभारी हेमंत शर्मा, देहात थाना, बड़ौदा थाना और सामरसा चौकी के स्टाफ पर लगे। हेमंत शर्मा जब बड़ौदा टीआई थे तब भाजपा के कई नेताओं ने उन पर रिश्वतखोरी व रेत माफियाओं से सांठगांठ के आरोप लगाते हुए शिकायतें की थीं। इसमें से सामरसा चौकी के प्रभारी को एसपी डॉ. शिवदयाल सिंह ने सस्पेंड किया लेकिन, अन्य पुलिस अधिकारी व थाना प्रभारियों का मामला जांच के नाम पर दबा दिया गया!

ऐसे-ऐसे आरोप भी लगे पुलिस पर

1.करीब पांच महीने पहले अगरा के जंगलों में वन विभाग की टीम पर भू-माफियाओं ने हमला कर दिया। घायल वन विभाग के कर्मचारी दो दिन तक अगरा से विजयपुर थाने भटकते रहे लेकिन, भू-माफिया एक जाति विशेष के होने के कारण सभी दोषियों पर एफआईआर नहीं हुई। इस मामले में फॉरेस्ट अफसरों ने अगरा थाना प्रभारी से लेकर कुछ वरिष्ठ पुलिस अफसरों के खिलाफ शिकायत भी की है।

2. गुरुनावदा गांव में एक दबंग ने ट्रैक्टर की टक्कर से आदिवासी युवक की जान ले ली। इस मामले में मानपुर थाने में एफआईआर हुई और ट्रैक्टर भी जब्त किया गया लेकिन, बाद में थाने से ट्रैक्टर बदलकर दूसरा रख दिया गया। इसकी शिकायत भी ग्रामीणों ने एसपी से की पर, जांच के नाम मामला दबा दिया गया।

3.सेसईपुरा थाने के पूर्व प्रभारी रोहित गुप्ता के खिलाफ एक युवक ने शिकायत की थी कि, थाना प्रभारी ने उसे बिना किसी दोष के हवालात में बंद कर इतना पीटा कि उसके हाथ तोड़ दिए। थाना प्रभारी ने 151 का प्रकरण बनाकर जेल भेज दिया। इस मामले की भी जांच ही चल रही है।

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