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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या , पत्नी ने 10 दिन पूर्व जताई थी हत्या की आशंका:

फ़ज़लुर्रहमान शैख़
expresssamachar.com

जौनपुर – उत्तर प्रदेश । प्रदेश के माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। यह घटना बागपत के जिला जेल में आज सुबह लगभग 6 बजे सुबह हुई। मुन्ना बजरंगी जौनपुर के पूरे दयाल कसेरू के मूल निवासी थे।उधर एक सप्ताह पूर्व मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने लखनऊ में 29 जून को एक प्रेसवार्ता कर अपने पति की हत्या की आशंका जताई थी। प्रमुख सचिव गृह ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।

बागपत में आज बसपा के पूर्व विधायक लोकेंद्र दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। रविवार को उनको झांसी जेल से बागपत जेल लाया गया था। आज सुबह ही जेल में एक बंदी द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। गोली कैसे चली अभी यह स्पष्ट जानकारी नही हो पाई है। सूत्रों का कहना है कि जेल में बंद बदमाश सुनील राठी ने गोली मारी है। यह भी कहा जा रहा है कि कई बन्दी गोली चलाने में शामिल थे।

मुन्ना बजरंगी पर सरकार द्वारा 7 लाख का इनाम घोषित था। उन पर भाजपा विधायक कृष्णा नंद राय की हत्या का आरोप था। इसके अलावा उन पर दर्जनों संगीन अपराध का आरोप था। पूरे प्रदेश में मुन्ना बजरंगी का अपराध की दुनिया मे दबदबा था। जौनपुर के मूल निवासी मुन्ना बजरंगी का जरायम की दुनिया मे तब नाम आया जब 1995 में जौनपुर के जमालपुर बाजार में ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे और जिला पंचायत सदस्य राजकुमार सिंह की ए के 47 से हत्या हुई थी । इसके पहले भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करने का आरोप आया था।

मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने 29 जून को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हत्या की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि यूपी की एसटीएफ और कुछ सफेदपोश नेता एनकाउंटर या जेल में हत्या करने साजिश कर रहे है। उन्होंने खाने में जहर देने की भी आशंका व्यक्त की थी ।उन्होंने समुचित सुरक्षा की मांग मुख्यमंत्री से की थी। इतने के बावजूद हत्या हो जाने से पुलिस और प्रशासन कठघरे में आ गया है।

उधर सरकार ने इस घटना के मजिस्ट्रेट जांच का आदेश कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जेल के अंदर हत्या के लिए असलहा कैसे पहुँचा। बागपत जेल में पूरा पुलिस महकमा मौजूद है। कोई भी सरकारी अफसर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नही दे रहा है।

मुन्ना बजरंगी को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का खास माना जाता था। 80 के दशक में अपराध में कदम रखा। 5 तक पढ़ा मुन्ना का पूर्वांचल के अपराध की दुनिया दबदबा था। 2014 में वह मड़ियाहूं विधानसभा से अपना दल से चुनाव भी लड़ा था। कभी अपने अपराध के लिए किदवंती बने मुन्ना बजरंगी को 1997 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। परंतु कुछ दिन बाद जमानत पर छूट गया और फिर फरार हो गया था। बाद में 2004 में दिल्ली पुलिस के एक एनकाउंटर में मुन्ना बजरंगी को गोली लगी तब वह बच गया। बाद में उसे यूपी पुलिस ने अपने कस्टडी में लिया। तब से वह जेल में ही था

कौन था मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था. उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे. मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया. उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी. किशोर अवस्था तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे.

मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था. वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था. यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया. जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा. वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया.

अस्सी के दशक में की थी पहली हत्या

मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था. इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया. मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था. इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी. उसके मुंह खून लग चुका था. इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया. उसके बाद उसने कई लोगों की जान ली.

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया. यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था. मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई. मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था. वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था.

ठेकेदारी और दबंगई ने बढ़ाए दुश्मन

पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था. लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ था. उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था. इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे. इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे. कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था. उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी.

मुन्ना ने की थी भाजपा विधायक की हत्या

मुख्तार से फरमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची. और उसी के चलते 29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया. उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK47 से 400 गोलियां बरसाई थी. इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे. पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुईं थी. इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी. हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा. इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था.

 

सात लाख का इनामी था मुन्ना

भाजपा विधायक की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी. इसलिए उस पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया. उस पर हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामलों में शामिल होने के आरोप है. वो लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा. पुलिस का दबाव भी बढ़ता जा रहा था.

मुंबई में ली थी पनाह

यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी. उसका यूपी और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था. दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं था. इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया. उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा. इस दौरान उसका कई बार विदेश जाना भी होता रहा. उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे. वह मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश दे रहा था.

राजनीति में आजमाई किस्मत

एक बार मुन्ना ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की. मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था. जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे. यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहे थे. बीजेपी से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा. वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया. कांग्रेस के वह नेता भी जौनपुर जिले के रहने वाले थे. मगर मुंबई में रह कर सियासत करते थे. मुन्ना बजरंगी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में नेता जी को सपोर्ट भी किया था.

ऐसे गिरफ्तार हुआ था मुन्ना

उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था. उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं. लेकिन 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था. इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी. मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था. बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है. इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया. तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा है. इस दौरान उसके जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे मामले भी सामने आते रहे हैं. मुन्ना बजरंगी का दावा है कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की है

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