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भूखे लोगों को देशभक्ती सिखाने वालों……..

फ़ज़लुर्रहमान शैख़ 

expresssamachar.com

बीते रोज़ भाजपा के एक विधायक कह रहे थे कि अगर हिन्दुत्तव बचाना है तो हिन्दुओं को कमसे कम पांच बच्चे पैभूखे लोगों को देशभक्ती सिखाने वालों……..दा करने होंगे, यह सिर्फ इत्तेफाक ही है कि जिस रोज़ भाजपा के विधायक का यह बयान आया उसी रोज़ के अखबार में एक खबर प्रकाशित हुई कि दिल्ली के मंडावली में भूख की वजह से तीन बच्चियों की मौत हो गई। यह भी इत्तेफाक ही है कि जिन बच्चियों की भूख की वजह से मौत हुई है वे बच्चियां भी एक हिन्दू परिवार की ही हैं। लेकिन इंसानियत का मुंह चिढ़ाती इस घटना पर शायद ही किसी को गुस्सा आए, और शायद ही किसी की भावनाऐं उद्वेलित हो पाऐं।

हर एक घटना को हिन्दू मुस्लिम के नज़रिये से देखने वाले लोगों के लिए यह घटना इंसानियत को शर्मशार करने वाली नहीं है क्योंकि इस घटना में जिन बच्चियों की जान गई है उनका हत्यार कोई ‘मुसलमान’ नही है बल्कि उनका खाली पेट है। यह घटना मुसलमानो को भी क्रोध नहीं दिला पायेगी क्योंकि मरने वाली बच्चियां किसी ‘मुस्लिम’ परिवार की सदस्य नही थीं। यह घटना टीवी पर चीखते चिल्लाते उन एंकरों को भी क्रोध नहीं दिलायेगी जो आए दिन स्टूडियो में चीखकर, चिल्लाकर, धमकाकर, ‘देशभक्ती’ का पाठ पढ़ाते हैं। लेकिन यह घटना जहां इंसियत के सिये कलंक है वहीं यह घटना भारत के लिये भी कलंक है क्योंकि हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

क्या कहते हैं आंकड़े:

सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें दावा किया गया था दुनिया में भुखमरी बढ़ रही है। और भूखे लोगों की लगभग 23 फीसदी आबादी भारत में निवास करती है। भूमंडलीय भुखमरी पर यूएन की इस रिपोर्ट में कहा गया था कि 2030 तक भुखमरी मिटाने का अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य भी खतरे में पड़ गया है। स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड की 2017 की इस रिपोर्ट में बताया गय था कि दुनिया के कुपोषितों में से 19 करोड़ कुपोषित लोग तो सिर्फ भारत में ही हैं। भारत की आबादी के सापेक्ष भूख की मौजूदगी लगभग साढ़े 14 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 119 विकासशील देशों में भूख के मामले में भारत 100वें स्थान पर है। जबकि 2016 में भारत 97वें स्थान पर था। यानी इस मामले में देश की हालत और बिगड़ी है।
कैसी अजीब विडंबना है कि भारत सरकार के लिये यह रिपोर्ट शर्म का विषय नहीं बनती और न ही टीवी चैनलों पर डिबेट होती और न ही देश में फल फूल रहे दक्षिणपंथियों का खून इस रिपोर्ट पर खौलता। क्या ये शर्म की बात नहीं कि भूख के मामले में भारत उत्तर कोरिया, इराक और बांग्लादेश से भी बदतर हालत में है? साल भर पहले आई इस रिपोर्ट में 3/4 के स्कोर के साथ भारत में भूख की हालत को गम्भीर बताते हुए कहा गया था कि दक्षिण एशिया की कुल आबादी की तीन-चौथाई भारत में रहती है। ऐसे में देश के हालात का पूरे दक्षिण एशिया के हालात पर असर पड़ना स्वाभाविक है। इस रिपोर्ट में देश में कुपोषण के शिकार बच्चों की बढ़ती तादाद पर भी गहरी चिंता जताई गई है।
इसी रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में पांच साल से कम उम्र के 38 प्रतिशत बच्चे सही पोषण के अभाव में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं, जिसका असर बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास, पढ़ाई-लिखाई और बौद्धिक क्षमता पर पड़ता है। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि पड़ोसी देश, श्रीलंका और चीन का रिकॉर्ड इस मामले में भारत से बेहतर है जहां क्रमशः करीब 15 प्रतिशत और 9 प्रतिशत बच्चे कुपोषण और अवरुद्ध विकास के पीड़ित हैं। रिपोर्ट में बताया गया था कि भारतीय महिलाओं के हाल भी कोई अच्छे नहीं। रिपोर्ट बताती है कि नौजवान उम्र की 51 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं यानी उनमें खून की कमी है।

राजधानी में भूख से मर गए बच्चे:

देश की राजधानी दिल्ली जहां से देश के लिये योजनाएं बनती हैं, और एक मुख्यमंत्री एवं देश के प्रधानमंत्री दिल्ली में ही निवास करते हों वहां भूख से मौत हो जाना, लेकिन किसी तरह का प्रदर्शन, राजनेताओं के माथे पर किसी तरह की शिकन तक न आना, आखिर क्या साबित करता है? यही की सरकारों के लिये आम आदमी उस वक्त कोई मायने नहीं रखती जब उस लाश पर राजनीतिक रोटियां न सेंकी जा सकें। देश में आये दिन गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग हो रही है लेकिन भूख से तड़प-तड़प कर मरने वाले इंसानों के लिये भी क्या कोई मुहिम चलेंगी ? हाल ही में राजस्थान के अलवर में गाय के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय के एक युवक की हत्या हुई। इस हत्या पर टिप्पणी करते हुए राजस्थान सरकार के श्रम मंत्री जसवंत यादव ने कहा कि ‘मैं मुस्लिम समाज से कहता हूं कि गायों की तस्करी बंद करें। हिंदुओं की भावनाओं को समझें। जिस तरह से 50-50 गायों को ट्रक में ले जाया जाता है। उनके मुंह में तेजाब डाला जाता है तो फिर हिंदू का खून खौलता है।’ सवाल यहीं से पैदा होता है कि गाय के लिये सुनी सुनाईं बातों पर मंत्री महोदय का खून खौल जाता है। लेकिन भूख के कराण मरने वाले बच्चों के लिये उन जैसे किसी भी मंत्री नेता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती?

देश में ऐसे अनेकों संगठन हैं जो ‘हिन्दु बचाओ’ का नारा लगाकर समाज में द्वेष फैलाते हैं, ऐसे दर्जनों नेता हैं जो हिन्दुओं से पांच, दस आठ बच्चे पैदा करने की अपील करते हैं लेकिन जब मंगल सिंह की तीन बच्चियां जिसमें दो साल की सुक्का, चार साल की पारुल आठ साल की मानसी, रोटी न होने की वजह से भूख से तड़प तड़प कर मर जाती हैं, तब न तो किसी संगठन का खून खौलता, और न ही कहीं यह नारा सुनाई देता कि ‘हिन्दू खतरे’ में है। जब झारखंड की कोयली देवी की बेटी भात भात करके तड़प-तड़प कर भूख से दम तोड़ती है तब धर्म के रक्षक न तो उस बच्ची की लाश उठाने जाते और न ही राशन पहुंचाने। आये दिन लोगों को देशभक्ती का पाठ पढ़ाने वाले भी ऐसी मौतों पर खामोश हो जाते हैं। जबकि इन घटनाओं पर उन्हें चीखना चाहिये था, क्योंकि भूख से लोगों को मारने वाले किसी आतंकी संगठन के आतंकी नहीं हैं, किसी दुश्मन देश के लोग भी नहीं हैं, बल्कि वे लोग हैं जिन्होंने काग़जों पर देश से भुखमरी को उखाड़ फेंका है।

 

भूखे लोगों को देशभक्ती सिखाने वालों।
भूख इंसान को गद्दार बना देती है।

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