पूर्णिमा कार्यक्रम में बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बताए सुख-शांति और बरकत के उपाय
शाकाहारी, नशामुक्त और देशभक्त जीवन अपनाने का दिया संदेश

आगर मालवा। माघ पूर्णिमा के अवसर पर 1 फरवरी 2026 को आयोजित सतसंग कार्यक्रम में वक्त गुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सुख-शांति और बरकत पाने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि अमावस्या-पूर्णिमा और तीज-त्योहार जीवन के बीतते समय की याद दिलाते हैं। मनुष्य की उम्र धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है और एक दिन ऐसा आएगा जब न दिन-रात, न अमावस्या-पूर्णिमा देखने का अवसर मिलेगा, सब यहीं छूट जाएगा।
बाबा उमाकान्त जी महाराज ने नाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नाम दो प्रकार के होते हैं—वर्णनात्मक और ध्वन्यात्मक। वर्तमान समय का वर्णनात्मक नाम *“जयगुरुदेव”* है। इस नाम का नियमित रूप से सुबह-शाम उच्चारण करने से कष्ट दूर होते हैं, कर्म कटते हैं और विपत्ति में रक्षा होती है। उन्होंने कहा कि ध्वन्यात्मक नाम समरथ गुरु से नामदान के समय प्राप्त होते हैं, जिनके अभ्यास से अंतर में प्रकाश होता है और प्रभु का दर्शन संभव होता है।
सुख-शांति और बरकत के संबंध में उन्होंने कहा कि साधना के लिए गृहस्थ जीवन छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। परिवार के साथ रहते हुए, सतसंग सुनते हुए और *जयगुरुदेव* नाम का जप करते रहने से घर में संतोष, शांति और समृद्धि बनी रहती है। ईमानदारी और मेहनत की कमाई से ही बरकत आती है, जबकि बेईमानी और हिंसा से अर्जित धन नष्ट हो जाता है।

