January 19, 2026 |
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पिता की स्मृति में बेटे का सेवा संकल्प: स्व. रतनलाल जामलिया की 14वीं पुण्यतिथि पर मोहना में डॉ. संजय जामलिया ने लगाया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

Express Samachar

आरिफ खान, आगर मालवा। कुछ रिश्ते रक्त से नहीं, सेवा से अमर होते हैं। स्वर्गीय रतनलाल जामलिया ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिनकी स्मृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उनकी 14वीं पुण्यतिथि पर मोहना में जो दृश्य देखने को मिला, वह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि पिता के संस्कारों को बेटे द्वारा जीवंत रखने की मिसाल था।

स्वर्गीय रामरतन जामलिया के पुत्र, प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय जामलिया ने पिता की पुण्यतिथि को शोक में नहीं, सेवा के महायज्ञ में बदल दिया। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, मोहना में आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर में मानवता की सेवा का ऐसा दृश्य दिखा, जिसने हर उपस्थित व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

शिविर में 65 यूनिट रक्तदान हुआ। रक्त की हर बूंद मानो यह कह रही थी कि रतनलाल जामलिया आज भी लोगों के लिए धड़क रहे हैं। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, लेकिन असली सम्मान उन चेहरों की मुस्कान थी, जिन्हें जीवन का संबल मिला।

शिविर में 718 से अधिक मरीजों की जांच की गई। 95 मरीजों को मधुमेह की दवाइयां निःशुल्क दी गईं। वहीं नेत्र विशेषज्ञों द्वारा 312 लोगों की आंखों की जांच की गई और 145 जरूरतमंद मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन की सलाह एवं दवाइयां प्रदान की गईं।
हर मरीज के चेहरे पर राहत थी और हर आंख में आभार।

डॉ. संजय जामलिया ने पिता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन करते हुए कहा कि “पिता ने हमें हमेशा इंसान की पीड़ा समझना सिखाया। आज जो कुछ कर पा रहा हूं, वह उन्हीं संस्कारों का परिणाम है।” यह कहते हुए उनका स्वर भी भावुक हो उठा।

यह आयोजन यह संदेश दे गया कि मृत्यु देह की होती है, विचारों की नहीं। स्वर्गीय रामरतन जामलिया आज भी मोहना के लोगों के बीच सेवा, संवेदना और संस्कार के रूप में जीवित हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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