8 वर्षीय बालिका शिवन्या ने रखा रमजान में पहला रोजा।
हिंदू–मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल, इफ्तार पर देश-प्रदेश की सुख-शांति की दुआ।

रिपोर्ट -जहीर उद्दीन (सोनू)आगर मालवा।
एक्सप्रेस समाचार।
आगर मालवा। पवित्र माह रमजान में जहां मुस्लिम समुदाय इबादत, रोजा और दुआओं में मशगूल है, वहीं आगर मालवा जिले के एकता नगर से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है।आगर जिले के वार्ड नम्बर 3 एकता नगर निवासी 8 वर्षीय बालिका शिवन्या गिरी पिता अखलेश गिरी गोस्वामी, ने इस वर्ष रमजान का अपना पहला रोजा रखकर हिंदू–मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की है। छोटी सी उम्र में बालिका शिवन्या गिरी की यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज को आपसी प्रेम और सद्भाव का मजबूत संदेश भी देती है।
नन्हीं उम्र, बड़ा संदेश।
सुबह सेहरी के समय उठकर बालिका शिवन्या ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रोजे की शुरुआत की। दिनभर बिना कुछ खाए-पिए उसने धैर्य और संकल्प का परिचय दिया। परिवारजनों ने बताया कि शिवन्या ने यह रोजा समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देने के उद्देश्य से रखा।
इफ्तार पर मांगी अमन-चैन की दुआ।
शाम को इफ्तार के समय अच्छे से अच्छे पकवान बनकर घर के आस पास मोहल्ले में भी इफ्तार के लिए खाने पीने की सामग्री बांटी और शिवन्या ने रोजा खोलने से पहले इफ्तार के समय देश और प्रदेश की सुख-शांति, अमन-चैन और आपसी भाईचारे के लिए दुआ की। उसके इस कदम की पूरे मोहल्ले में चर्चा हो रही है। मोहल्ले स्थानीय लोगों ने एवं मिलने जुलने वालो ने इसे गंगा-जमुनी तहजीब की सुंदर झलक बताते हुए शिवन्या और उसके परिवार की सराहना की।
समाज को मिला सकारात्मक संदेश।
आज के दौर में जब समाज को आपसी सौहार्द और प्रेम की सबसे अधिक आवश्यकता है, ऐसे में एक मासूम बच्ची का यह कदम प्रेरणादायक है। शिवन्या ने यह साबित कर दिया कि एकता और भाईचारा उम्र का मोहताज नहीं होता।
आगर मालवा जिले में शिवन्या का यह पहला रोजा लोगों के लिए मिसाल बन गया है और हर कोई उसके जज़्बे को सलाम कर रहा है।