Shelendra Gehlot / Sat, Aug 8, 2026 / Post views : 103
रिपोर्टर - शैलेन्द्र गेहलोत
पिपलोंनकला आगर मालवा।
पिपलोंनकला । पर्युषण पर्व की आराधना को जन-जन तक पहुंचाने और स्वाध्याय के माध्यम से समाज में आत्मजागरण की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय स्वाध्याय महासंघ की स्वाध्याय जागरण यात्रा का शुभारंभ पिपलोन से हुआ। यात्रा की प्रथम बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष नवरत्न परिवार अरुण फुलेरा के निवास स्थान पर आयोजित हुई। बैठक में स्वाध्याय, पर्युषण आराधना और भगवान महावीर के संदेश को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में राजेश जैन डगवाला ने कहा कि मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए पर्युषण पर्व की आराधना को केवल परंपरा तक सीमित न रखते हुए उसके वास्तविक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्युषण आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि, क्षमा, संयम और सहनशीलता के माध्यम से स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है।
इसके बाद राकेश जावरा एवं आशीष चौड़ेया ने भी अपने विचार रखते हुए स्वाध्याय के माध्यम से समाज को जोड़ने तथा लोगों को पर्युषण आराधना के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में युवा स्वाध्याय बंधुओं संयम जैन डग, अक्षत जैन बड़ोद, लवेश जैन इंदोख, आयुष जैन इंदोख एवं अक्षाल जैन चोमेला ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे किस प्रकार स्वाध्याय महासंघ से जुड़े और स्वाध्याय की साधना से उनके जीवन में क्या सकारात्मक परिवर्तन आया। युवाओं के अनुभवों ने यह संदेश दिया कि स्वाध्याय केवल सुनने और सुनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानने और जीवन को बदलने की साधना है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भौतिक चकाचौंध, व्यस्तता और प्रतिस्पर्धा के बीच मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में पर्युषण पर्व आत्मा की ओर लौटने और अपने भीतर झांकने का अवसर प्रदान करता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण फुलेरा ने पिपलोन पहुंचे सभी स्वाध्याय बंधुओं का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। पिपलोन नगर से अखिल भारतीय स्वाध्याय महासंघ से जुड़े पांच स्वाध्यायियों का भी स्वागत किया गया। वहीं महासंघ की ओर से फुलेरा परिवार का बहुमान एवं अभिनंदन किया गया।
पिपलोन में हुई यह प्रथम बैठक केवल जागरण यात्रा का शुभारंभ नहीं, बल्कि स्वाध्याय, आत्मजागरण और पर्युषण आराधना को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प की शुरुआत बनी। उपस्थित स्वाध्याय बंधुओं ने संकल्प लिया कि जहां तक उनकी पहुंच और प्रयास होगा, वहां तक स्वाध्याय का संदेश पहुंचाया जाएगा और भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने के लिए समाज को प्रेरित किया जाएगा।
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