Express Samachar / Sat, Sep 12, 2026 / Post views : 48
रिपोर्ट - जहीर उद्दीन (सोनू) आगर मालवा।
एक्सप्रेस समाचार।
आगर-मालवा। कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना की कार्यप्रणाली, पत्रकारों के प्रति कथित उपेक्षापूर्ण रवैये, संवादहीनता एवं जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में कवरेज को लेकर पत्रकारों में नाराजगी सामने आई है। शनिवार दोपहर गांधी उपवन छावनी में आयोजित पत्रकारों की आवश्यक बैठक में पत्रकारों ने खुलकर अपनी बात रखी और चर्चा के बाद सर्वसम्मति से कलेक्टर डॉ. मीना के कार्य व्यवहार की निंदा का प्रस्ताव पारित करते हुए राज्य शासन से उन्हें तत्काल हटाने की मांग की।
गांधी उपवन में जुटे पत्रकार, सर्वसम्मति से लिया निर्णय।
शनिवार दोपहर एक बजे गांधी उपवन में हुई बैठक में पत्रकारों ने कलेक्टर की कार्यशैली एवं पत्रकारों के साथ समन्वय की स्थिति पर चर्चा की। पत्रकारों का कहना है, कि प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद की कमी के साथ जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में पत्रकारों को कवरेज से रोकने जैसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित नहीं है। बैठक में उपस्थित पत्रकारों ने पूरे मामले पर विचार-विमर्श के बाद निंदा प्रस्ताव पारित किया।
पत्रकारों ने राज्य शासन से मांग की कि डॉ. शेर सिंह मीना को आगर-मालवा जिले से तत्काल हटाकर ऐसे अधिकारी को कलेक्टर पद पर नियुक्त किया जाए, जो पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों एवं आमजन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए जवाबदेही के साथ कार्य करे।
किसान संघ भी जता चुका है नाराजगी।
बैठक में पत्रकारों ने किसान संघ द्वारा पूर्व में कलेक्टर के खिलाफ जताई गई नाराजगी का भी उल्लेख किया। किसान संघ के पदाधिकारियों के अनुसार 2 सितंबर को किसानों की समस्याओं को लेकर हुई बैठक में उनकी मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। बैठक के दौरान किसान संघ के जिला अध्यक्ष रामनारायण तेजरा पर किसानों को भड़काने जैसे आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई, जिसके बाद किसान संघ के पदाधिकारी बैठक का बहिष्कार कर चले गए।
इसके बाद 4 सितंबर को किसान संघ ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए तत्काल हटाने की मांग को लेकर एएसपी रविंद्र कुमार बोयट को प्रदेश शासन के मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।
पत्रकारों के निंदा प्रस्ताव के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल।
कलेक्टर के खिलाफ पत्रकारों द्वारा सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने और तत्काल हटाने की मांग के बाद जिले के प्रशासनिक एवं राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब पत्रकारों की इस मांग पर राज्य शासन क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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