Mon, 07 Sep 2026
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मौत के बाद भी संघर्ष! : कीचड़ और दलदल के बीच शव को कंधे पर लेकर श्मशान पहुंचते ग्रामीण।

Express Samachar / Sun, Sep 6, 2026 / Post views : 22

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रिपोर्ट जहीर उद्दीन सोनू आगर मालवा।

एक्सप्रेस समाचार।

आगर-मालवा। आगर-मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील के ग्राम मुलियाखेड़ी में ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। गांव में श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी बेहद बढ़ जाती है। किसी ग्रामीण की मौत होने पर परिजनों और ग्रामीणों को कीचड़, दलदल और फिसलन भरे कच्चे रास्ते से शव को कंधे पर लेकर श्मशान तक पहुंचने की मजबूरी बनी हुई है।

बारिश में अंतिम यात्रा भी बन जाती है चुनौती।

ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दौरान श्मशान तक जाने वाला रास्ता कीचड़ से भर जाता है। जगह-जगह पानी और कीचड़ होने के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अंतिम यात्रा के दौरान शव को कंधे पर लेकर ग्रामीणों को जोखिम उठाते हुए रास्ता पार करना पड़ता है। मौत के बाद भी परिवार और ग्रामीणों का संघर्ष खत्म नहीं होता।

श्मशान घाट पर शेड तक की सुविधा नहीं।

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल रास्ते की नहीं है। गांव में व्यवस्थित श्मशान घाट की सुविधा भी नहीं है। शेड के अभाव में बारिश के दौरान चद्दर तानकर अंतिम संस्कार करने की नौबत आ जाती है। ग्रामीणों ने श्मशान स्थल पर शेड और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

कई बार शिकायत फिर भी सिर्फ आश्वासन।

ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान तक पक्का रास्ता बनाने और श्मशान घाट के विकास को लेकर कई बार जनसुनवाई में आवेदन दिए जा चुके हैं। पंचायत से लेकर तहसील स्तर तक अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका।

जन विश्वास शिविर में भी उठाया मुद्दा।

हाल ही में आयोजित जन विश्वास शिविर में भी ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पक्का रास्ता बनाने और श्मशान घाट के बनवाने की मांग को लेकर आवेदन दिया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से उनमें नाराजगी है।

ग्रामीणों की मांग—अब आश्वासन नहीं, चाहिए स्थायी समाधान।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए श्मशान घाट तक पक्का एवं शेड निर्माण कराया जाए और अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा भी सम्मान और सुविधा के साथ हो सके, इसके लिए अब वर्षों पुराने आश्वासनों की जगह जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए।

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