Arif Khan / Mon, Dec 15, 2025 / Post views : 170
शिविर में 65 यूनिट रक्तदान हुआ। रक्त की हर बूंद मानो यह कह रही थी कि रतनलाल जामलिया आज भी लोगों के लिए धड़क रहे हैं। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, लेकिन असली सम्मान उन चेहरों की मुस्कान थी, जिन्हें जीवन का संबल मिला।
शिविर में 718 से अधिक मरीजों की जांच की गई। 95 मरीजों को मधुमेह की दवाइयां निःशुल्क दी गईं। वहीं नेत्र विशेषज्ञों द्वारा 312 लोगों की आंखों की जांच की गई और 145 जरूरतमंद मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन की सलाह एवं दवाइयां प्रदान की गईं।
हर मरीज के चेहरे पर राहत थी और हर आंख में आभार।
डॉ. संजय जामलिया ने पिता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन करते हुए कहा कि “पिता ने हमें हमेशा इंसान की पीड़ा समझना सिखाया। आज जो कुछ कर पा रहा हूं, वह उन्हीं संस्कारों का परिणाम है।” यह कहते हुए उनका स्वर भी भावुक हो उठा।
यह आयोजन यह संदेश दे गया कि मृत्यु देह की होती है, विचारों की नहीं। स्वर्गीय रामरतन जामलिया आज भी मोहना के लोगों के बीच सेवा, संवेदना और संस्कार के रूप में जीवित हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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